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ऋषि – मुनि
शरद पूर्णिमा 2025: चांदनी में छुपा मां लक्ष्मी का खजाना और कृष्ण की लीला का रहस्य
हिंदू पंचांग के अनुसार, शरद पूर्णिमा का दिन और रात वर्ष की सबसे शुभ और दिव्य तिथियों में से एक मानी जाती है। यह वही रात्रि है जब माता लक्ष्मी ने पृथ्वी पर प्रकट होकर अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया और भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास…
शारदीय नवरात्रि 2025 का दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, महत्व और आरती
शारदीय नवरात्रि का आज दूसरा दिन है और इस दिन माँ दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। इस प्रकार, मां ब्रह्मचारिणी तप, संयम और साधना का प्रतीक स्वरूप…
🌺 नवरात्रि में कौन से अनुष्ठान करें? शास्त्रोक्त विधि और महत्व 🌺
नवरात्रि साधना, उपवास और माँ दुर्गा की पूजा का श्रेष्ठ काल है। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से महानवमी तक चलने वाले इन नौ दिनों को शक्ति की उपासना, आत्मसंयम और आध्यात्मिक उन्नति का पर्व माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है—
"नवरात्रं तु यत्…
परम्पराओं की ओर लौटें: बर्तनों में छिपा स्वास्थ्य और संस्कृति का रहस्य
भारतीय संस्कृति में बर्तन केवल खाना परोसने का साधन नहीं रहे, बल्कि ये स्वास्थ्य, पर्यावरण और आध्यात्मिक जीवन से गहरे जुड़े रहे हैं। हमारे पूर्वजों ने मिट्टी, तांबा, पीतल और कांसे जैसे धातुओं से बने बर्तनों को प्राथमिकता दी। इनका चयन केवल…
इन्दिरा एकादशी: पितरों की मुक्ति और मोक्ष का व्रत
भारत की संस्कृति में हर एक पर्व और उपवास केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन के गहरे सत्य को दर्शाता है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इन्दिरा एकादशी कहा जाता है। इस व्रत का महत्व इतना है कि इसे करने से न सिर्फ़ साधक को पुण्य मिलता है,…
सावधान! श्राद्ध में एक गलती और पितरों की जगह राक्षस खा जाते हैं भोजन
श्राद्ध—एक ऐसा अनुष्ठान, जिसे हल्के में लेना बहुत बड़ा पाप है। शास्त्रों में लिखा है कि श्राद्ध के दौरान भोजन परोसने या खाने में ज़रा-सी चूक भी हो जाए, तो उसका परिणाम बेहद भयानक होता है।
मनुस्मृति और वायु पुराण बताते हैं कि अगर नियम…
शनिदेव की कथा: न्याय के देवता की कहानी और कृपा पाने के उपाय
सनातन धर्म में शनिदेव को न्याय का देवता माना गया है। वे हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं, चाहे वह राजा हो या रंक। शनिदेव की कथा हमें कर्म के सिद्धांत और न्याय के महत्व की गहरी सीख देती है।
शनिदेव का जन्म और तपस्या
पौराणिक…
सर्वपितृ अमावस्या 2025: गीता और गरुड़ पुराण में वर्णित महत्व
7 सितंबर 2025 से आरंभ हो रहा श्राद्ध पक्ष 21 सितंबर 2025 को सर्वपितृ अमावस्या और सूर्य ग्रहण के संयोग में समाप्त होगा। यह 16 दिवसीय काल हिंदू धर्म में पितृ तर्पण और श्राद्ध के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
शास्त्रों का आधार…
सर्वपितृ अमावस्या 2025: शास्त्रों में महत्व और पितृ मंत्र
पितृ पक्ष 2025 की शुरुआत 7 सितंबर (पूर्णिमा श्राद्ध, चंद्र ग्रहण के दिन) से होगी और समापन 21 सितंबर (सर्वपितृ अमावस्या, सूर्य ग्रहण के दिन) पर होगा। यह काल हमारे पूर्वजों को स्मरण कर उन्हें तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध अर्पित करने का अवसर…
सर्वपितृ अमावस्या 2025: शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध विधि और महत्व
7 सितंबर से आरंभ होने वाला पितृ पक्ष 21 सितंबर 2025 को सर्वपितृ अमावस्या और सूर्य ग्रहण के साथ समाप्त होगा। यह तिथि विशेष मानी जाती है क्योंकि ज्ञात-अज्ञात सभी पितरों का श्राद्ध इसी दिन किया जाता है।
शास्त्रों में…