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वेद- पुराण- उपनिषद

मकर संक्रांति 2026: सूर्य के उत्तरायण होते ही जागृत होती है ब्रह्म चेतना, जानिए पर्व का दिव्य रहस्य

🌞 मकर संक्रांति: जब सूर्य बनता है साधना का द्वार मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि कालचक्र का वह दिव्य क्षण है जहाँ ब्रह्मांड, प्रकृति और मानव चेतना एक ही लय में प्रवेश करते हैं। यह पर्व तिथिवाचक नहीं, बल्कि अयन-वाचक है—अर्थात यह…

माघ मेला 2026: पौष पूर्णिमा 3 जनवरी से तीर्थराज प्रयाग में  महापर्व का शुभारंभ

माघ मेला 2026 का शुभारंभ इस वर्ष पौष पूर्णिमा, 3 जनवरी 2026 (शनिवार) से तीर्थराज प्रयाग में हो रहा है। पौष पूर्णिमा के पावन स्नान के साथ ही माघ मास की शास्त्रोक्त साधनाओं का आरंभ माना जाता है। यही वह तिथि है, जब संगम तट पर कल्पवास प्रारंभ…

गृहस्थ आज और साधु-संत कल मनाएंगे देवउठनी एकादशी: जानें पूजा मुहूर्त, व्रत विधि और विशेष योग

🪔 देवउठनी एकादशी का महत्व और आरंभ हर वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी या देवोत्थान एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं और सृष्टि संचालन का कार्य पुनः प्रारंभ करते हैं। धार्मिक मान्यता के…

🪔 कोजागरी पूर्णिमा: अमृतमयी रात जब लक्ष्मी माँ पूछती हैं — “कौन जाग रहा है?”

हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। यह वही रात है जब चंद्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होकर पृथ्वी पर अमृत बरसाता है और माँ लक्ष्मी स्वयं आकर अपने जाग्रत भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। इस रात को…

परम्पराओं की ओर लौटें: बर्तनों में छिपा स्वास्थ्य और संस्कृति का रहस्य

भारतीय संस्कृति में बर्तन केवल खाना परोसने का साधन नहीं रहे, बल्कि ये स्वास्थ्य, पर्यावरण और आध्यात्मिक जीवन से गहरे जुड़े रहे हैं। हमारे पूर्वजों ने मिट्टी, तांबा, पीतल और कांसे जैसे धातुओं से बने बर्तनों को प्राथमिकता दी। इनका चयन केवल…

इन्दिरा एकादशी: पितरों की मुक्ति और मोक्ष का व्रत

भारत की संस्कृति में हर एक पर्व और उपवास केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन के गहरे सत्य को दर्शाता है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इन्दिरा एकादशी कहा जाता है। इस व्रत का महत्व इतना है कि इसे करने से न सिर्फ़ साधक को पुण्य मिलता है,…

सावधान! श्राद्ध में एक गलती और पितरों की जगह राक्षस खा जाते हैं भोजन

श्राद्ध—एक ऐसा अनुष्ठान, जिसे हल्के में लेना बहुत बड़ा पाप है। शास्त्रों में लिखा है कि श्राद्ध के दौरान भोजन परोसने या खाने में ज़रा-सी चूक भी हो जाए, तो उसका परिणाम बेहद भयानक होता है। मनुस्मृति और वायु पुराण बताते हैं कि अगर नियम…

शनिदेव की कथा: न्याय के देवता की कहानी और कृपा पाने के उपाय

सनातन धर्म में शनिदेव को न्याय का देवता माना गया है। वे हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं, चाहे वह राजा हो या रंक। शनिदेव की कथा हमें कर्म के सिद्धांत और न्याय के महत्व की गहरी सीख देती है। शनिदेव का जन्म और तपस्या पौराणिक…

सर्वपितृ अमावस्या 2025: शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध विधि और महत्व

7 सितंबर से आरंभ होने वाला पितृ पक्ष 21 सितंबर 2025 को सर्वपितृ अमावस्या और सूर्य ग्रहण के साथ समाप्त होगा। यह तिथि विशेष मानी जाती है क्योंकि ज्ञात-अज्ञात सभी पितरों का श्राद्ध इसी दिन किया जाता है। शास्त्रों में…

जन्माष्टमी विशेष: एक अलौकिक जन्म की अविस्मरणीय गाथा! पढ़ने मात्र से मिलता है पुण्य, होता है भाग्योदय

5252 वर्ष पूर्व भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रात के बारह बजे मथुरा के राजा कंस की जेल में वासुदेव की पत्नी, देवी देवकी, के गर्भ से सोलह कलाओं से युक्त भगवान्‌ श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। इस तिथि का रोहिणी नक्षत्र विशेष महत्व रखता है। जैसा…