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मकर संक्रांति 2026: एकादशी के कारण बदल गया दान का नियम, पढ़ें पूरा सच

मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है, जो सूर्य उपासना, उत्तरायण और दान-पुण्य से जुड़ा हुआ है। हर वर्ष की तरह वर्ष 2026 में भी मकर संक्रांति विशेष धार्मिक महत्व रखती है, लेकिन इस बार एक कारण से दान का नियम बदल गया है, जिसे जानना हर श्रद्धालु के लिए आवश्यक है।

इस वर्ष मकर संक्रांति 14 और 15 जनवरी 2026—दो दिनों तक प्रभावी रहेगी, लेकिन दान-पुण्य को लेकर दोनों दिनों के नियम अलग-अलग होंगे।


🌞 मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व

मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी के साथ खरमास समाप्त होता है और मांगलिक कार्यों का शुभ आरंभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिसे देवताओं का दिन कहा गया है।

शास्त्रों के अनुसार, इस पर्व पर किया गया स्नान, दान, सूर्योपासना और मंत्र जप सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य प्रदान करता है।


⏰ मकर संक्रांति 2026 का पुण्य और महापुण्य काल

🔹 पुण्य काल

14 जनवरी 2026 (बुधवार)
दोपहर 3:13 बजे से
15 जनवरी सुबह 08:00 बजे तक

🔸 महापुण्य काल

14 जनवरी 2026
दोपहर 3:13 से शाम 4:58 बजे तक


⚠️ 14 जनवरी को क्यों बदला दान का नियम?

14 जनवरी 2026 को षटतिला एकादशी व्रत पड़ रहा है। एकादशी तिथि पर शास्त्रों में कुछ स्पष्ट नियम बताए गए हैं:

  • इस दिन अन्न (चावल, गेहूं आदि) खाना और दान करना वर्जित माना गया है
  • केवल तिल, फल, गुड़ और फलाहारी वस्तुओं का दान किया जा सकता है
  • खिचड़ी का सेवन या दान इस दिन नहीं करना चाहिए

इसी कारण इस बार मकर संक्रांति पर दान का नियम बदला हुआ माना जा रहा है।


🍲 खिचड़ी दान 15 जनवरी को ही क्यों करें?

मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान एक प्राचीन और स्वास्थ्य से जुड़ी परंपरा है। खिचड़ी में चावल, दाल, घी और तिल जैसे तत्व होते हैं, जो शीत ऋतु में शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं।

लेकिन चूंकि 14 जनवरी को एकादशी है और एकादशी तिथि में चावल निषिद्ध होता है, इसलिए:

👉 खिचड़ी का दान, भोग और सेवन 15 जनवरी 2026 को करना ही शास्त्रसम्मत और उचित माना गया है।

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🛕 मकर संक्रांति पर क्या करें? (शास्त्रसम्मत विधि)

🔹 पवित्र स्नान

प्रातः किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि संभव न हो, तो स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

🔹 सूर्योपासना

स्नान के बाद उगते सूर्य को तांबे के पात्र में जल, गुड़, लाल पुष्प और कुमकुम मिलाकर अर्घ्य दें।

🔹 मंत्र जप

सूर्योपासना के बाद मंत्र जप, नाम स्मरण या श्रीमद्भगवद गीता का पाठ करें।

🔹 गाय और जरूरतमंदों को दान

गाय के लिए गुड़ या चारा निकालें और गरीब व जरूरतमंदों को वस्त्र, कंबल, तिल, गुड़ आदि का दान करें।

🔹 पितरों का स्मरण

इस दिन पितरों को प्रणाम करें और उनके निमित्त दान या तर्पण करना शुभ माना गया है।


🌾 क्षेत्रीय परंपराओं का सम्मान जरूरी

मकर संक्रांति भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाई जाती है। इसलिए शास्त्रों के नियमों के साथ-साथ अपने क्षेत्रीय रीति-रिवाजों का भी पालन करें।

मकर संक्रांति 2026 में आस्था वही है, लेकिन एकादशी के कारण दान का नियम बदला हुआ है। सही तिथि और सही विधि से किया गया दान-पुण्य ही पूर्ण फल प्रदान करता है।

👉 ध्यान रखें: खिचड़ी का दान 15 जनवरी 2026 को ही करें।