जया एकादशी 2026: पिशाच मोचन की पौराणिक कथा, पूजा विधि और पारण समय
क्या भूत-प्रेत सच में होते हैं? (Mystery & Hook)
मित्रों, क्या आपने कभी यह प्रश्न स्वयं से किया है कि मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा कहाँ समाप्त होती है?
क्या प्रेत योनि, पिशाच योनि या अधम योनियाँ केवल लोककथाएँ हैं, या फिर इनका शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख भी मिलता है? जया एकादशी की कथा बताती है हमे।
गरुड़ पुराण और पद्म पुराण इस विषय में अत्यंत स्पष्ट हैं—
मनुष्य को अपने कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है।
लेकिन सनातन धर्म केवल दंड की बात नहीं करता, वह प्रायश्चित और करुणा का भी मार्ग दिखाता है।
यदि कोई आत्मा अधम योनि में फँस जाए, तो उसका उद्धार कैसे संभव है?
इस प्रश्न का उत्तर है—जया एकादशी।
साल 2026 में 29 जनवरी (गुरुवार) को आने वाली जया एकादशी को शास्त्रों में पिशाच मोचन एकादशी कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन अनजाने में किया गया पुण्य भी बैकुंठ का द्वार खोल देता है।
आइए, ऋषियों की अमरवाणी के साथ उस जया एकादशी की पौराणिक कथा में प्रवेश करें, जहाँ एक श्राप अंततः मोक्ष का कारण बना।
पौराणिक कथा: जब स्वर्ग की अप्सरा बनी पिशाचिनी
यह कथा पद्म पुराण में वर्णित है।
स्वर्गलोक के नंदन वन में देवराज इंद्र की भव्य सभा सजी थी।
गंधर्व गान कर रहे थे, अप्सराएँ नृत्य में लीन थीं।
उसी सभा में एक गंधर्व था माल्यवान और एक अनुपम सौंदर्य वाली अप्सरा थी पुष्पवती।
नृत्य के दौरान दोनों की दृष्टि मिली और वे कामदेव के प्रभाव में आ गए।
लय टूटी, सुर बिगड़े और सभा की मर्यादा भंग हुई।
कला और अनुशासन के मर्मज्ञ इंद्र इसे सहन न कर सके।
क्रोधित होकर उन्होंने श्राप दिया—
“तुम दोनों स्वर्ग के योग्य नहीं हो।
मृत्युलोक में पिशाच योनि में जन्म लेकर अपने कर्मों का फल भोगो!”
क्षण भर में दोनों हिमालय की दुर्गम, बर्फीली गुफाओं में जा गिरे।
न अन्न, न जल, न आश्रय—ऊपर से पिशाच योनि की असहनीय पीड़ा।
दैवयोग देखिए—
वह दिन था माघ शुक्ल एकादशी, अर्थात जया एकादशी।
- भूख और भय से वे दिन भर कुछ खा न सके — अनजाने में व्रत हो गया
- हिमालय की ठंड से रात भर सो न सके — अनजाने में जागरण हो गया
जैसे ही द्वादशी लगी, आकाश से दिव्य विमान उतरा।
भगवान विष्णु प्रकट हुए।
उस अनजाने तप से प्रसन्न होकर भगवान ने न केवल पिशाच योनि से मुक्ति दी, बल्कि उन्हें पहले से भी अधिक दिव्य देव-शरीर प्रदान किया।
जब वे स्वर्ग लौटे, तो स्वयं इंद्र भी विस्मित रह गए।
यही है जया एकादशी की अलौकिक महिमा।
जया एकादशी 2026: तिथि, पूजा मुहूर्त और पारण समय

इस वर्ष जया एकादशी गुरुवार को पड़ रही है—जो स्वयं भगवान विष्णु का प्रिय वार है। यह संयोग व्रत को कई गुना फलदायी बनाता है।
|
जानकारी |
विवरण |
|---|---|
|
तारीख |
29 जनवरी 2026 (गुरुवार) |
|
पारण समय |
30 Jan, 07:10 AM – 09:20 AM |
|
महत्व |
पिशाच योनि से मुक्ति |
विशेष शास्त्रीय सुझाव
माघ मास होने के कारण—
- पूजा में तिल का प्रयोग अवश्य करें
- यदि पूर्ण जया एकादशी व्रत संभव न हो, तो
चावल और तामसिक भोजन का त्याग अवश्य करें
सभी व्रतों का राजा है ये व्रत: पुण्य, मोक्ष और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति का महान पर्व
ट्रेवल गाइड: इस दिन कहाँ मिलेगा सबसे अधिक पुण्य?
माघ मास में आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है—प्रयागराज (इलाहाबाद)।
क्यों प्रयागराज?
- त्रिवेणी संगम
- माघ मेला
- कल्पवास की परंपरा
कैसे पहुँचें
- रेल: प्रयागराज जंक्शन देशभर से जुड़ा
- हवाई मार्ग: बमरौली (Prayagraj Airport)
कहाँ रुकें
- माघ मेले की टेंट सिटी (कल्पवास)
- सिविल लाइंस क्षेत्र के होटल
क्या करें
- त्रिवेणी संगम में स्नान
- किसी जरूरतमंद को तिल दान
- एकादशी पर केवल फलाहार (कुट्टू/सिंघाड़ा)
जया एकादशी का आध्यात्मिक संदेश
मित्रों,
जया एकादशी केवल एक व्रत नहीं—यह सनातन धर्म की करुणा का प्रमाण है।
यह व्रत बताता है कि—
चाहे पाप कितना ही बड़ा क्यों न हो,
यदि मन में पश्चाताप और विष्णु भक्ति है,
तो मोक्ष का द्वार कभी बंद नहीं होता।
ऋषि-वाणी
“जहाँ भय समाप्त होता है,
वहीं भक्ति का जन्म होता है।”
जया एकादशी 2026 पर
डर नहीं—दया,
अपराध नहीं—प्रायश्चित,
और बंधन नहीं—बैकुंठ की कामना करें।
जय श्री हरि।
— ऋषियों की अमरवाणी