गुरु पूर्णिमा पर शिव दीक्षा का दुर्लभ अवसर – घर बैठे बनाएं उन्हें अपना गुरु, पाएं सौभाग्य
“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः” – परंतु जब स्वयं महेश्वर ही आपके गुरु बन जाएं, तो यह सौभाग्य नहीं, दिव्य प्रसाद होता है। शिव केवल पूज्य नहीं हैं, वे ब्रह्मांडीय चेतना के ज्ञाता हैं। वे गुरु तत्व के मूर्त रूप हैं। इसीलिए आप घर बैठे उन्हें अपना गुरु बना सकते हैं – बिना किसी बाहरी औपचारिकता, केवल शुद्ध मन, श्रद्धा और संकल्प के साथ।
🧘♀️ घर बैठे शिव को गुरु बनाने की शास्त्रसम्मत विधि
📿 शुरुआत : स्थान और भाव
- किसी साफ-सुथरे स्थान पर, ध्यान की स्थिति में बैठ जाएं। चाहे कुर्सी हो, जमीन हो या सोफा – मन स्थिर और भाव सच्चे हों।
- आँखें बंद करें और भगवान शिव का आह्वान करें:
“हे देवों के देव महादेव! हे गुरुओं के गुरु! मुझे क्षमा करें, दोषहीन करें, और मेरे अनाहत चक्र में शिवाश्रम बना उसमें विराजमान हों।”
🙏 शिष्यता का आग्रह करें
- कहें:
“हे शिव! मैं आपको अपना गुरु स्वीकार कर रहा हूँ, कृपया मुझे शिष्य रूप में स्वीकारें। मेरे जीवन में स्थापित होकर मुझे शिवज्ञान दें।”
इस वाक्य को तीन बार दोहराएं। - फिर दोनों हाथ आकाश की ओर उठाएं और घोषणा करें:
“अखिल अंतरिक्ष सम्राज्य में मेरी घोषणा उद्घोषित है – शिव मेरे गुरु हैं, मैं उनका शिष्य हूं।”
(3 बार दोहराएं) - अंत में कहें:
“तथास्तु! हर हर महादेव! हर हर महादेव! हर हर महादेव!”
👉 यह विधि केवल एक बार करनी है। जैसे किसी शरीरधारी गुरु से एक बार दीक्षा होती है, वैसे ही शिवगुरु से भी।
🕯️ दैनिक साधना – शिवगुरु से संवाद
अब से हर दिन कुछ क्षण शिवगुरु को समर्पित करें।
🕉️ 1. गुरु वंदना – 5 मिनट
कहें:
“हे शिव! आप मेरे गुरु हैं। मैं आपका शिष्य हूं। मुझे शिवज्ञान दें, मेरी रक्षा करें।”
📖 2. गुरु दक्षिणा – राम नाम की भेंट
भगवान शिव को राम नाम प्रिय है।
- 10 मिनट राम नाम का जप करें।
- इससे पहले कहें:
“हे गुरुदेव! राम नाम की दक्षिणा आपको समर्पित करता हूं, कृपया मेरे मनमंदिर में बैठकर इसे स्वीकारें।”
❓ शिवगुरु से सवालों के उत्तर पाने की विधि
🧠 तंत्र: अवचेतन से शिव चेतना तक
- शांत होकर बैठें, 16 गहरी सांसें लें।
- कहें:
“हे शिव! मैं आपका शिष्य हूं। कृपया मेरे प्रश्न का उत्तर मुझे किसी भी रूप में दें। आपका धन्यवाद।”
(3 बार दोहराएं) - फिर साफ, एकल प्रश्न करें।
उत्तर अवश्य मिलेगा – स्वप्न में, विचार में, संकेत में या साक्षात्कार में।
धैर्य और श्रद्धा रखें।
🌠 शिवगुरु से इच्छाओं की पूर्ति का आग्रह
- शांत होकर बैठें, 16 बार लंबी सांस लें।
- कहें:
“हे शिव! मैं आपकी शरण में हूं। मेरी यह विशेष कामना है…”
(कामना स्पष्ट हो, एक बार में एक ही कामना रखें) - तीन बार वही प्रार्थना दोहराएं और कामना कहें।
💔 समस्याओं से मुक्ति का आग्रह शिवगुरु से
- शांत मन से बैठें, 16 सांसें।
- कहें:
“हे शिवगुरु! मैं समस्याओं से घिरा हूं, कृपया मार्ग दिखाएं, मुझे कष्टों से बाहर निकालें।”
(3 बार दोहराएं) - उसके बाद समाधान का इंतजार करें। जवाब आएगा, संदेह नहीं रखें।
📜 शिव शिष्य के नियम – केवल दो
- किसी की आलोचना नहीं करें।
- गैरज़रूरी तर्क और बहसों से बचें।
शिवगुरु न सजा देते हैं, न डराते हैं। वे पिता हैं – शिष्य को गिराकर नहीं, उठाकर सिखाते हैं।
🌺 विशेष उपासना – जब सोमवार और अष्टमी साथ आएं
- काले तिल और साबुत चावल जल में मिलाकर शिव को अर्पित करें।
- गन्ने के रस से अभिषेक करें।
- साबुत मूंग अर्पित करें।
- बिल्व पत्र पर शहद लगाकर, अपनी हथेली से शिवलिंग पर अर्पित करें।
यह विशेष अर्पण शिव को अत्यंत प्रिय है और शिवगुरु कृपा को तीव्र कर देता है।
आपका शिवगुरु के साथ यह संबंध केवल अध्यात्मिक नहीं, ब्रह्मांडीय गठबंधन है। यह जीवन बदलने वाला मार्ग है – समाधान, शांति, शक्ति और शिवज्ञान की ओर।
हर हर महादेव। जय शिवगुरु।