हनुमान चालीसा को सिद्ध करें और दिव्य फल पाएं
सनातन धर्म में भगवान हनुमानजी की भक्ति को विशेष स्थान दिया गया है। गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित हनुमान चालीसा न केवल भक्तों के लिए आस्था का आधार है, बल्कि यह साधना का महान मंत्र भी है।
शास्त्रों में कहा गया है—
“कवन सो काज कठिन जग माहीं, जो नहीं होहि तात तुम्ह पाहीं।”
अर्थात् जगत में ऐसा कोई कार्य नहीं जो पवनपुत्र हनुमानजी की कृपा से सिद्ध न हो सके।
हनुमान चालीसा के महत्त्व को समझें
हनुमान चालीसा मात्र पाठ्य नहीं, बल्कि ध्यान और जप का विषय है। जप का अर्थ है शब्द पर ध्यान। प्रत्येक चौपाई का अर्थ समझकर किया गया जाप साधक के जीवन को दिशा देता है।
- दुःख और बाधाओं से मुक्ति
- रोगों का शमन
- मानसिक बल और स्थिरता
- लक्ष्य की प्राप्ति
ये सब लाभ अर्थ सहित जाप से ही मिलते हैं।
साधना आरंभ करने की विधि
- साधना का समय – राम नवमी, हनुमान जयंती या मंगलवार की रात्रि १० बजे के बाद।
- स्थान और आसन – स्नान कर लाल/भगवा वस्त्र धारण करें। लाल आसन पर उत्तर दिशा की ओर बैठें।
- पूजन सामग्री –
- 108 भुने चने या 108 तिल की रेवड़ियाँ
- हनुमानजी का चित्र/यंत्र/विग्रह
- गणेशजी का प्रतीक (जैसे सुपारी)
- दीपक, धूप, सिंदूर, पुष्प, फल, गुड़, चने आदि।
- पूजन क्रम –
- पहले गणेश पूजन और “ॐ वक्रतुण्डाय हुम्” मंत्र का जप।
- गुरु का ध्यान और आशीर्वाद।
- हनुमानजी का पूजन, सिंदूर से तिलक, पुष्प और नैवेद्य अर्पण।
- “हं” बीज मंत्र का उच्चारण और प्राणायाम।
- संकल्प लें—अपने नाम, गोत्र और गुरु का स्मरण कर इच्छित कार्य के लिए।
हनुमान चालीसा जप-विधि
- 108 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- हर पाठ पूर्ण होने पर एक चना/रेवड़ी हनुमानजी को अर्पित करें।
- यह साधना 21 दिन निरंतर या 21 मंगलवार तक की जा सकती है।
- साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।
जप के समय ध्यान रखें—
“ॐ अतुलित बलधामं हेमशैलाभ देहं,
दनुजवन कृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं,
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥”
हनुमान चालीसा सिद्ध होने के लक्षण
- जीवन के कार्यों में कोई बाधा न आना।
- हाथ में मंगल रेखा का प्रकट होना।
- शनि की साढ़ेसाती अथवा ढैया का प्रभाव न रहना।
- भूत-प्रेतादि नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा।
- सपनों में हनुमानजी या उनके दिव्य रूप के दर्शन।
- शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार।
विशेष ध्यान रखने योग्य बातें
हनुमानजी की साधना में मन, वाणी और शरीर की शुद्धता आवश्यक है।
- मन में अशुद्ध विचार न आने दें।
- वाणी से अपशब्द, कटुवचन और असत्य से बचें।
- शरीर से कोई भी अनुचित या हिंसक कर्म न करें।
हनुमानजी का नाम स्वयं “हनु” (हनन) + “मान” (अहंकार/यश) से बना है।
अर्थात्, अहंकार का हनन कर सच्चा मान प्राप्त करने वाले।
✍🏻 इस प्रकार अर्थ सहित हनुमान चालीसा का जप साधक को आध्यात्मिक ऊँचाई, मानसिक स्थिरता और भौतिक जीवन की बाधाओं से मुक्ति देता है।