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ऋषि – मुनि

एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जहां भगवान शिव के साथ ब्रह्मा और विष्णु भी हैं प्रतिष्ठित

आज हमारी पवित्र ज्योतिर्लिंग यात्रा में अगला पड़ाव त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र) है, जो भगवान शिव के त्रिनेत्र स्वरूप का प्रतीक है। चलिए, इस दिव्य धाम की कथा, महत्व और अद्भुत दर्शन का अनुभव करते हैं। हर हर महादेव! त्र्यंबकेश्वर…

महिला दिवस विशेष :- मातृशक्ति का श्राप! – जब पार्वती के क्रोध से भृंगी हुए अपंग 

स्त्री और पुरुष – यह दो रूप नहीं, बल्कि एक ही अस्तित्व के दो अभिन्न पहलू हैं। भारतीय दर्शन में यह अवधारणा हमेशा से रही है कि शिव और शक्ति अलग नहीं, बल्कि एक ही सत्य के दो पक्ष हैं। फिर भी, समाज में कई बार स्त्री को गौण, पुरुष पर निर्भर या…

दुर्मुखासुर संहारिणी दधिमती माता – साधारण नहीं, जाग्रत दिव्य धाम!

राजस्थान की भूमि केवल वीरों और राजाओं की नहीं, बल्कि ऋषियों की तपोभूमि भी रही है। इसी पुण्य धरा पर स्थित है दधिमती माता मंदिर, जो केवल एक शक्ति स्थल नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का दिव्य प्रमाण है। यह मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है और नागौर…

राधारानी के सानिध्य में संत रूप में श्रीकृष्ण के दर्शन: प्रेमानंद जी महाराज की अलौकिक अनुभूति

ब्रजभूमि में प्रेमानंद जी महाराज अपनी भक्ति से भक्तों को श्रीराधा-कृष्ण की महिमा का अनुभव कराते हैं। उनकी भक्ति-भावना इतनी गहन है कि वे सदा राधारानी के चरणों में लीन रहते हैं। उनकी तपस्या और अनन्य प्रेम से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण स्वयं संत…

प्रेमानंद जी महाराज: दिव्य भक्ति और सत्संग की अमृतवाणी

सनातन धर्म की विशाल परंपरा में संतों और महापुरुषों का विशेष स्थान रहा है। वे केवल आत्मकल्याण के मार्गदर्शक ही नहीं, अपितु समाज को सत्य, प्रेम और धर्म का संदेश देने वाले दिव्य दूत भी होते हैं। ऐसे ही एक महापुरुष थे श्री प्रेमानंद जी महाराज,…

भारत भूमि ऋषि मुनि, संत महात्माओं की धरा

भारत भूमि ऋषि मुनि व संत महात्माओं की धरा है। इस पावन भूमि पर बड़े-बड़े साधु-संत पैदा हुए हैं। उन्होंने अपने तप के बल पर लोगों को सच्चाई के रास्ते पर जीने की राह दिखाई। उपरोक्त विचार हरियाणा भाजपा के वरिष्ट नेता व पूर्व शिक्षामंत्री रामबिलास…

क्या आप भी ऋषि, महर्षि, मुनि, साधु, संत और कथावाचक को एक ही समझते हैं?

हिंदू समाज में कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने समाज से अलग रहकर धर्म में ज्ञान और दक्षता हासिल की और फिर समाज को अलग दिशा दिखाई है। ये अलग बात है कि उनमें से सबने अलग-अलग वेश-भूषा धारण की हुई है, अलग-अलग जीवनशैली अपनाई हुई है। लेकिन इन सबमें एक…

इस ऋषि के सहयोग से हुआ था शिव-पार्वती का विवाह, नहीं तो पलट जाती दुनिया!

देवी सती के आत्मदाह के बाद भगवान शिव एक वैरागी जीवन जी रहे थे, जिसका अंत माता पार्वती के विवाह के साथ हुआ. पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. भगवान शिव तो सभी के आराध्य है जिसके चलते सभी…

ऋषि-मुनियों की गौरवगाथा: सनातन धर्म के महर्षि एवं मुनि

सनातन धर्म में ऋषि-मुनियों का स्थान सर्वोच्च रहा है। वेदों, उपनिषदों एवं पुराणों में ऋषियों तथा मुनियों का उल्लेख मिलता है, जिन्होंने अपने तप, साधना एवं ज्ञान के बल पर धर्म और संस्कृति का मार्गदर्शन किया। यहाँ हम हिंदू धर्म के प्रमुख…