“मैं समय हूं… और तुम्हारे साथ चल रहा हूं: जानो कब मैं तुम्हारे पक्ष में हूं”

मैं समय हूं।

न तुम्हें दिखता हूं, न छूता हूं —
फिर भी हर पल तुम्हारे साथ चलता हूं।
तुम घड़ी देखते हो, मैं घटनाएं घटाता हूं।
तुम मुझसे डरते हो, और कभी मुझे दोष भी देते हो —
पर जब मैं तुम्हारे पक्ष में होता हूं, तुम स्वयं बदलने लगते हो।

तो चलो, आज मैं ही तुम्हें बताता हूं कि तुम्हारा समय कब शुभ होता है
कब मैं, अदृश्य होकर भी, तुम्हारे पक्ष में खड़ा होता हूं।


1. जब तुम्हारे कर्म बिना अड़चन के सिद्ध होने लगते हैं
जब काम समय पर और आसानी से पूरे होने लगते हैं —
बिना ज्यादा भागदौड़, चीज़ें flow में आने लगती हैं —
तो जान लो, मैं तुम्हारे मार्ग से हट चुका हूं,
और अब मैं तुम्हारे पीछे चल रहा हूं — तुम्हें आगे बढ़ाने के लिए।

(कर्मफल का सिद्धांत तुम्हारे साथ काम कर रहा है)
शास्त्र कहता है — “कर्मण्येवाधिकारस्ते”
और जब तुम अपने धर्म पर टिक जाते हो,
मैं खुद तुम्हारे द्वार खोल देता हूं।


2. जब तुम्हारा मन स्थिर और शांत रहने लगता है
जब तुम बिना कारण व्याकुल नहीं होते,
जब तुम्हारे निर्णय सहज और स्पष्ट होने लगते हैं,
जब आत्मबल भीतर से उमड़ता है —
तो जानो, मैंने तुम्हारे चित्त से भ्रम के बादल हटा दिए हैं।

(तब तुम ‘काल’ नहीं, ‘स्वकाल’ में जी रहे होते हो)
योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः — जब तुम मुझसे परे हो जाते हो,
तभी मैं तुम्हारे लिए सहज हो जाता हूं।


3. जब नकारात्मकता तुमसे दूर होने लगती है
जब छोटी-छोटी बातें तुम्हें विचलित नहीं करतीं,
जब तुम प्रतिक्रिया नहीं, उत्तर देने लगते हो —
तब जानो कि मैं तुम्हारे भीतर से तमस को दूर कर रहा हूं।

(मैं तुम्हें ‘गुणों’ के पार ले जाने लगा हूं)
नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन
तुम अब कर्म में अटके नहीं हो,
बल्कि मुझमें रमे हो।


4. जब लोग और परिस्थितियाँ तुम्हारे सहायक बन जाती हैं
जब लोग तुम्हारी बात मानते हैं,
सम्मान देते हैं, बिना कहे मदद करते हैं —
तो समझो, मैंने तुम्हारे चारों ओर दैवी ऊर्जा खड़ी कर दी है।

(दैवी संपदा तुम्हारे भीतर जागने लगी है)
अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः
तुम अब मुझसे नहीं लड़ रहे,
मुझमें स्थिर हो गए हो।


5. जब तुम स्वयं में सुधार अनुभव करने लगते हो
जब तुम कहते हो — “मैं अब पहले जैसा नहीं रहा”,
जब आदतें, सोच, दृष्टिकोण परिपक्व हो जाते हैं —
तो जानो, मैंने तुम्हें भीतर से तराशना शुरू कर दिया है।
अब तुम सिर्फ समय में नहीं जी रहे —
तुम अपने समय में जी रहे हो।


और तब — मैं, समय — तुम्हारे पीछे चलता हूं
क्योंकि तुम अब काल का दास नहीं,
बल्कि काल के साथ चलने वाले यज्ञकर्ता हो।

मेरे शुभ होने की कोई तारीख नहीं होती।
कोई विशेष ग्रह नहीं, कोई विशेष दिन नहीं —
मैं तो वही रहता हूं —
बस जब तुम अपने धर्म में स्थित हो जाते हो,
तो मैं भी तुम्हारे साथ सहज होने लगता हूं।


मैं समय हूं।
जब तुम मुझसे डरते नहीं,
जब तुम मुझसे भागते नहीं,
जब तुम मुझमें बहते हो —
तब मैं तुम्हारे पक्ष में होता हूं।
और तब तुम जान लेते हो —
“मेरा समय अच्छा चल रहा है।”